
ज्योतिषीय चाल और इसका महत्व
हमारे सौरमंडल में ग्रहों का निरंतर गोचर एवं परिवर्तन होता रहता है। प्रायः ग्रह हर 27 से 30 दिनों में अपनी स्थिति बदलते हैं। इन गतिविधियों का व्यक्तिगत कुंडलियों तथा उससे जुड़े जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जब दो ग्रह एक ही नक्षत्र या राशि में आते हैं, तो कुछ विशेष युति या योग का निर्माण होता है। ये योग विभिन्न राशियों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं।
गुरु चांडाल योग की संज्ञा और उसका प्रभाव
गुरु और राहु का मिलन कुछ विलक्षण प्रभाव उत्पन्न करता है, जिसे गुरु चांडाल योग कहते हैं। इस योग का निर्माण तब होता है जब बृहस्पति और राहु निकटता में आते हैं, और इसका प्रभाव लगभग एक वर्ष तक सक्रिय रहता है। जब सौरमंडल में इन दोनों ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि वे एक ही नक्षत्र में होते हैं, उस समय बहुत ही प्रभावी गुरु चांडाल योग का जन्म होता है। राहु का गुरु के संपर्क में आने की वजह से इसके सア










