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कठुआ हमले की इनसाइड स्टोरी: गढ़वाल रेजिमेंट के शौर्य की दास्तां

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हमले का दिन: घात लगाकर हुआ हमला

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 8 जुलाई का दिन भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दिन बन गया था। उस दिन, जब भारी हथियारों से लैस आतंकवादी घात लगाकर हमला करने के लिए बसे थे, 22 गढ़वाल रेजिमेंट के जवान अपने नियमित गश्ती पर थे।

सीमा के पास लोहई मल्हार के बदनोता गांव के पास माचेडी-किंडली-मल्हार मार्ग पर सेना के दो वाहन मौजूद थे। अचानक दोपहर के लगभग तीन बजकर तीस मिनट पर आतंकियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। वे छिपकर जवानों पर हमला करना चाहते थे, उनकी मंशा जवानों के हथियार लूटने और उन्हें नुकसान पहुँचाने की थी।

भारी गोलीबारी और जवानों का जवाब

पहली गोली चलते ही, गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने अपनी बंदूकें उठा लीं और पल भर में ही उनके हथियार आग उगलने लगे। आतंकवादियों के हमले का जवाब देने के लिए जवानों ने 5100 से ज्यादा राउंड गोलियां बरसाईं, जिससे आतंकवादी झुंड बनाकर भागने पर मजबूर हो गए। यह मुठभेड़ दो घंटे से ज्यादा समय तक चली।

इस गोलीबारी में पांच जवान शहीद हुए और पांच अन्य जवान घायल हो गए। शहीद होने वालों में नायब सूबेदार आनंद सिंह, हवलदार कमल सिंह, नायक विनोद सिंह, राइफलमैन अनुज नेगी और राइफलमैन आदर्श नेगी शामिल थे। ये सभी जवान उत्तराखंड से थे और उनकी शहादत ने पूरे देश को गर्व से भर दिया।

गोलियों की बौछार और अद्वितीय वीरता

गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने बेहतरीन साहस दिखाया। इनमें राइफलमैन कार्तिक सिंह भी थे, जिनका दाहिना हाथ ग्रेनेड के छर्रों से घायल हो गया था। लेकिन अपनी अद्वितीय वीरता और समर्पण का परिचय देते हुए, कार्तिक सिंह ने अपने बाएं हाथ से तब तक गोलीबारी जारी रखी, जब तक उनका हथियार जाम नहीं हो गया।

भारतीय सेना के इन वीर जवानों ने आतंकवादियों के नापाक इरादे को नाकाम कर दिया। घटना स्थल पर खून से सने हेलमेट, खोखे और जले हुए वाहन पड़े मिले, जो इस मुठभेड़ की भीषणता को बयां कर रहे थे।

साक्ष्यों की जांच और हमले की जिम्मेदारी

अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों की जांच शुरू की, जिनमें खून से सने हेलमेट और गोलियों के खोखे शामिल थे। माना गया कि आतंकवादी तीन लोगों के समूह में थे और दो अलग-अलग स्थानों पर छिपे थे। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ‘कश्मीर टाइगर्स’ ने ली थी।

पिछले महीने में जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में यह पांचवां आतंकी हमला था। इस क्षेत्र में हाल के महीनों में हुई आतंकी घटनाओं ने लोगों के बीच एक भय का माहौल पैदा कर दिया है। सीमावर्ती जिलों पुंछ, राजौरी, डोडा और रियासी में भी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों से यह क्षेत्र दहल गया है।

वीरता का समर्पण: जवानों का इलाज और सम्मान

घायल जवानों को पठानकोट के सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। भारतीय सेना के एक अधिकारी ने कहा, “जबरदस्त शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करते हुए, गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने आतंकवादियों पर 5,189 गोलियां चलाईं, जिससे उन्हें भागने को मजबूर होना पड़ा।”

इन जवानों ने घायल होने के बावजूद अन्तिम समय तक अपनी वीरता दिखाई और अपने साथियों की रक्षा की। इस खबर के बाद, देशभर में इन वीर सपूतों की बहादुरी का सम्मान किया गया और उनके परिवारों को सांत्वना देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

गढ़वाल रेजिमेंट का शौर्य: बद्री विशाल की जय

मुठभेड़ के दौरान, शहीद जवानों और उनके साथियों ने “बद्री विशाल की जय” का जयकारा लगाते हुए आतंकवादियों का मुकाबला किया। यह जवानों की अदम्य साहस और निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक था।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ के इस हमले ने यह साबित किया कि भारतीय सेना के जवान हर मुश्किल स्थिति में दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए सन्नद्ध हैं। उनकी वीरता और बलिदान ने पूरे देश को एक बार फिर गर्व से झुका दिया।

हम इन वीर जवानों के अद्वितीय साहस को सलाम करते हैं और उनके शौर्य को हमेशा याद रखते हुए उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। उनके इस बलिदान ने हमारे देश की रक्षा की और हमें प्रेरणा दी है कि सशक्त और संगठित रहना ही सबसे बड़ा सम्मान है।

पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ‘कश्मीर टाइगर्स’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। जम्मू क्षेत्र वैसे तो अपने शांतिपूर्ण माहौल के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के महीनों में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमलों से यह दहल गया है। ये हमले सीमावर्ती जिलों पुंछ, राजौरी, डोडा और रियासी में हुए हैं।