
पौष पूर्णिमा का पावन पर्व
जैसा कि हम हिन्दू पंचांग के अनुसार जानते हैं, पौष महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा अत्यंत पवित्र मानी जाती है और इसे पौष पूर्णिमा कहा जाता है। इस वर्ष यह दिन 25 जनवरी, गुरूवार को मनाया जाएगा जो अपने साथ धार्मिक महत्व लेकर आता है। यह दिन स्नान, दान, और भजन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अनेक शास्त्रों व ग्रंथों के अनुसार, पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान तथा दान से जीवन के सभी दुःख और क्लेश मिट जाते हैं और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर-घर का कोना धन-धान्य से भर जाता है।
पूजा और प्रार्थना की पारंपरिक प्रक्रिया
पौष पूर्णिमा के दिन साधक पवित्र नदियों में स्नान के बाद उन्होंने त्याग, शांति, तपस्या, संयम का पालन करते हुए चाँद की रोशनी में माता लक्ष्मी और चंद्र देव की अराधना करते हैं। इस प्रकार की पूजन विधि सभी बाधाओं को दूर कर शांति, समृद्धि और सुखों का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस वर्ष के विशेष सात संयोग
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर इस बार सात दुर्लभ और महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं जो कि विशेषकर शुभ हैं। इनमें शामिल हैं गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, त्रिग्रही योग और गुरु योग। इनमें से विशिष्ट रूप से गुरु पुष्य योग में किसी नए व्यापार, संपत्ति, सोना-चांदी की खरीदी करना विशेष रूप से मांगलिक माना जाता है। यह योग धनार्जन, विवाह, संतान, सुख-सौभाग्य एवं कीर्ति में वृद्धि का साक्षात्कार कराता है।
संयोगों के प्रभाव और महत्व
आइए समझते हैं इन योगों के प्रभाव और उनके महत्व को। गुरु पुष्य योग जो 25 जनवरी की सुबह 8:16 से शुरू होकर 26 जनवरी की सुबह 7:12 तक विद्यमान रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग पूर्णिमा के पूरे दिन प्रभावी रहेगा। अमृत सिद्धि योग, जो 25 जनवरी की सुबह 8:16 से 26 जनवरी की सुबह 7:12 तक रहेगा, साथ ही रवि योग व प्रीति योग जो अलग-अलग समय में सक्रिय रहेंगे। त्रिग्रही योग में बुध, मंगल, और शुक्र तीनों ग्रह धनु राशि में विराजमान होंगे, जिससे पद, प्रतिष्ठा और भाग्योदय में बृद्धि होगी।
पौष पूर्णिमा और दान के मुहूर्त
पौष पूर्णिमा के पवित्र तिथि की शुरुआत 24 जनवरी की रात 9:49 से होगी और समाप्ति 25 जनवरी की रात 11:23 पर। स्नान दान का शुभ मुहूर्त 5:26 से 6:20 तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, सत्यनारायण की पूजा करना भी इस दिन शुभ होगा।
पौष पूर्णिमा का यह शुभ दिन हमें पूजा और दान के माध्यम से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सुनहरा अवसर देता है। इसलिए इस दिवस को हमें पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मानना चाहिए।










