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शादी के श्वेतपत्र: मार्च में मिलेंगे सिर्फ 10 शुभ विवाह मुहूर्त यहां जानिए तारीखें

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भारतीय संस्कृति में शादी को आत्माओं का मिलन माना जाता है, एक ऐसा पवित्र बंधन जो दो जीवनों को न सिर्फ भौतिक रूप से बल्कि आध्यात्मिक और खगोलीय स्तर पर भी एक-दूसरे से जोड़ता है। इसीलिए, हिंदू धर्मावलंबियों के बीच विवाह से पहले वर और वधु की कुंडली का मिलान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके सितारे एक-दूसरे के अनुकूल हैं। कुंडली मिलान के बाद आता है विवाह मुहूर्त का चयन, जिसमें तिथि, लग्न और नक्षत्र के अनुरूप सबसे शुभ समय का पता लगाया जाता है।

आशा और आकांक्षाओं के नए साल 2024 का मार्च माह करीब आ रहा है, और इस महीने की शादी के लिए मुहूर्तों का चयन जोड़ों के लिए सुखद और संपूर्णता का संदेश लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, मार्च में विवाह के लिए कुल 10 शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। आइए, हम समझते हैं कि इन तिथियों का क्या महत्व है और ये किन-किन दिनों पर पड़ रही हैं।

1 मार्च, शुक्रवार के दिन, वार्षिक कैलेंडर के आरंभ में ही विवाह का उत्तम मुहूर्त 06:46 AM से दोपहर 12:48 PM तक है। इस दिन स्वाति नक्षत्र दोपहर बारह बजकर अड़तालीस मिनट तक रहेगा, उसके उपरां� विशाखा नक्षत्र का आगमन होगा। यह दिन रवि योग के तत्वों से भी संपन्न होगा।

2 मार्च, शनिवार को, रात 08:24 से प्रातः 06:44 तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त है। इस दिन त्रिपुष्कर योग और रवि योग एक साथ आ रहे हैं, जो इस दिन को अतिशुभ बना सकते हैं। विशाखा नक्षत्र और अनुराधा नक्षत्र का योग भी इस रात को विशेष बनाता है।

3 मार्च, रविवार को उचित विवाह की मंगलम बेला प्रातः 06:44 से दोपहर 03:55 तक है, जबकि अनुराधा नक्षत्र प्रभावी रहेगा।

4 मार्च, सोमवार को रात्रि 10:16 से सुबह 06:42 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र के अनुरूप वर्षपत्रिका में एक अन्य उद्घाटन मुहूर्त है।

5 मार्च, मंगलवार को मूल नक्षत्र को पार करते हुए पूर्वाषाढा नक्षत्र की ओर बढ़ते हुए, सुबह 6:42 से दोपहर दो बजकर नौ मिनट तक विवाह के लिए अनुकूल समय है।

6 मार्च, बुधवार को पूर्णाषाढा नक्षत्र से शुरू होकर उत्तराषाढा नक्षत्र तक, दोपहर 2:52 से अगली सुबह 06:40 बजे तक विवाह के लिए परम शुभ क्षण हैं।

7 मार्च, गुरुवार को प्रातः 06:40 से सुबह 8:24 बजे तक का संक्षिप्त किंतु शुभ मुहूर्त है, जिसके बाद श्रवण नक्षत्र का प्रवेश होता है।

10 मार्च, रविवार की रात 01:55 बजे से अगले दिन शाम को 06:35 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग के दौरान पूर्व भाद्रपद नक्षत्र और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में विवाह के लिए एक सुनहरा अवसर है।

11 मार्च, सोमवार को प्रातः 06:35 से अगली सुबह 06:34 बजे तक, उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र के अधीन सफल विवाह संपन्न हो सकते हैं।

12 मार्च, मंगलवार का प्रातः 06:34 से दोपहर 03:08 तक का मुहूर्त सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, और अमृत सिद्धि योग के विशेष संयोग में है, जबकि रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।

उपरोक्त सारी जानकारियां पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दी गई हैं। इन्हें विशेषज्ञों के परामर्श से अंतिम मान्यता के लिए देखा जाना चाहिए।

हिंदू धर्म में विवाह स्थाई संबंधों का प्रतीक है, और अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ पवित्र बंधन में बंधने की योजना बना रहे हैं तो यह सुनहरा अवसर है कि आप इन शुभ मुहूर्तों का उपयोग करें और अपने संबंधों को और भी अधिक सफल बनाएं। संगीत की धुन में शहनाई की गूंज आपके जीवन में सुख-सौभाग्य और समृद्धि की लहर लेकर आए, इसी कामना के साथ।

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