
मथुरा: कलयुग के प्रतीक श्री कल्कि के धाम का उद्घाटन
प्राचीन भारतीय धार्मिक शास्त्रों की एक अत्यन्त गूढ़ बात है जिसके अनुसार परम्परागत चार युगों में से अंतिम युग कलयुग, के आखिरी चरण में विष्णु का दसवां अवतार, कल्कि, प्रकट होगा। उनका यह स्वरूप श्रेष्ठतापूर्ण 64 कलाओं से युक्त होगा और वे अपने सफेद घोड़े पर आरोहण कर समस्त पापियों का संहार करते हुए धरती पर पुनः धर्म की स्थापना करेंगे। इसी भविष्यवाणी के चलते, भारत के संभल नगर में एक अद्वितीय ‘कल्कि धाम’ नामक मंदिर की स्थापना हो रही है, जहां भगवान कल्कि का वास होगा।
कलियुग की गणना और अवतार कल्कि का आगमन
हिन्दू धर्म के अनुसार, कलियुग की लंबाई 4 लाख 32 हजार वर्ष निर्धारित की गई है। 3102 ईसा पूर्व में जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब से कलयुग का प्रारंभ माना जाता है। वर्तमान की गणना में 2023 जोड़ दें तो लगभग 5125 वर्ष बीत चुके हैं, और अभी और 426875 वर्ष शेष रहते हैं।
हिन्दू पुराणों के अनुसार, कलियुग का आरंभ एक घटना के कारण हुआ, जब महाभारत के शेष राजा परीक्षित ने एक ऋषि का अपमान किया था। इस अपमान का फल रूप में राजा परीक्षित को ऋषि के शाप से मृत्यु का सामना करना पड़ा। उस दिन से कलयुग की शुरुआत मानी जाती है।
श्री कल्कि धाम: संभल का निर्माणाधीन मंदिर
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित एंकरा कंबोह इलाके में यह भव्य मंदिर स्थापित हो रहा है। इस मंदिर की दीवारों को सफेद और भगवा रंग से सजाया जा रहा है तथा आचार्य प्रमोद कृष्णम इस निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं।
क्यों खास है संभल का कल्कि धाम?
हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के दस अवतारों में से कल्कि अंतिम अवतार हैं और इनकी प्रतीक्षा कलयुग के अंत में होती है। जिस अवतार के लिए यह मंदिर समर्पित है, वह अभी प्रकट नहीं हुआ है, जिससे इसकी दिव्यता और भी असीमित हो जाती है। इसके अलावा अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर, इस मंदिर में उसी गुलाबी पत्थर का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसकी भव्यता और भी अधिक बढ़ जाती है।
मंदिर की विशेषता और निर्माण कार्य
मंदिर में 10 गर्भगृह होंगे जिसमें भगवान विष्णु के दसों अवतारों की प्रतिमा स्थापित होगी। विशेषता यह होगी कि इस मंदिर का निर्माण किसी भी प्रकार के स्टील या लोहे का उपयोग किए बिना किया जा रहा है। लगभग 5 एकड़ में फैले इस विशाल मंदिर के निर्माण में 5 साल का समय लगने का अनुमान है।
इस प्रयत्न से स्पष्ट होता है कि भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक परम्पराओं की जड़ें गहरी हैं और यहां की प्राचीन सोच व कथाएं आज भी समकालीन संस्कृति और समाज को प्रभावित करती हैं। भगवान कल्कि के अयन और उनके संभल के धाम की महत्ता, भविष्य की धर्मनिष्ठा और न्यायप्रियता के प्रतीक के रूप में हमारे साथ रहेगी।










