
होली का आगाज़: रमणरेती आश्रम से शुरुआत
भारतीय उत्सवों की बहार में होली का त्योहार एक अनूठा स्थान रखता है। होली, जिसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, का भव्य उत्सव इस वर्ष गोकुल में दस दिन पूर्व से ही प्रारम्भ होने जा रहा है। यहाँ की गलियाँ ब्रज की होली के माहौल से सजग हो उठी हैं। संतों के जयकारे और भक्तों की उल्लास भरी हंसी से गोकुल अनुरंजित हो गया है।
रमणरेती, जहाँ संत गुरु शरणानंद महाराज का आश्रम स्थित है, वहाँ से होली के जश्न की अनूठी शुरुवात हो चुकी है। इस वर्ष की होली ने नेचुरल कलर्स और फूलों के विविध रंगों से सभी का मन मोह लिया है।
फूलों से महका पर्व
रमणरेती आश्रम का होली उत्सव अनोखा है, जहाँ प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता है और फूलों से होली खेली जाती है। टेसू के फूल, जिनका उपयोग रंगों के रूप में किया जाता है, इस बार भी होली के रंगों में घुल-मिल गए हैं। संतों और भक्तों ने इन रंगों और फूलों की होली में सम्मिलित होकर पर्व की मिठास और बढ़ा दी है। राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने भी पिचकारी की धारा से भक्तों पर प्रेम की वर्षा की।
आश्रम में होली की विभिन्न झाँकिया
रमणरेती आश्रम परम्पराओं का निर्वहन करते हुए इस साल भी कई प्�रकार की होली जैसे लठमार होली, लड्डू होली, फूलों की होली और टेसू के फूलों की होली का आयोजन कर रहा है। इसके साथ ही राधा-कृष्ण की लीला का मंचन भी खूबसूरती से किया जा रहा है।
होली के अवसर पर मथुरा-गोकुल सहित सम्पूर्ण ब्रज में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है। इस पावन पर्व में प्रेम और समर्पण की ऐसी अद्भुत संगीतमय संध्या होती है, जिसमें सभी शामिल होकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाते हैं।
सारे जहाँ से अच्छा, ब्रज की होली
रमणरेती आश्रम के इस आयोजन में न केवल स्थानीय लोग बल्कि विदेशी पर्यटक भी हिस्सा लेने आते हैं। होली के इस पारंपरिक रूप को विश्व पटल पर प्रस्तुत करता रमणरेती आश्रम भारतीय संस्कृति का एक सशक्त मंच है। इस बार भी होली की इस महफ़िल में हर कोई डूबा नज़र आया।
इस प्रकार, गोकुल में होली की यह रंगीन छटा, जीवन में उमंग और उत्साह का संचार करती है। इसी भावना के साथ ब्रजवासी हर वर्ष इस पर्व की प्रतीक्षा करते हैं, और दुनिया भर से यहाँ आये पर्यटक इस अद्वितीय अनुभव को अपने साथ वापस ले जाते हैं। यहाँ की होली न सिर्फ़ रंगों की होती है, बल्कि यह एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। गोकुल की इन्हीं गलियों में होली का यह पर्व सदियों से अनवरत जारी है, और आगामी होली में भी यही उल्लास देखने को मिलेगा। सो, आइए और साक्षी बनिए इस अद्भुत और आनंदमयी होली के महोत्सव के।










